सुप्रीम कोर्ट ने कहा, स्थापित कानूनी स्थिति को देखते हुए, आरोपी के सुधार और पुनर्वास की संभावना को ध्यान में रखना हमारा कर्तव्य है. पीठ में न्यायमूर्ति बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति बी. आर. नागरत्ना भी शामिल थे. पीठ ने कहा, न केवल अपराध बल्कि अपराधी, उसकी मानसिक स्थिति और उसकी सामाजिक आर्थिक स्थितियों को भी ध्यान में रखना हमारा कर्तव्य है.
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