प्रशान्त पांडेय का कहना है कि बाहर के कानून व्यवस्था का निर्वहन वही ठीक से कर सकता है जो अपने अंदर एक सयंमित अनुशासन या कानून बना कर चले. अंदर का कानून आपको अध्यात्म सिखाता है इसलिए इस दिशा में हमें ज्यादा से ज्यादा काम करना होगा.
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