सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, ‘दूसरे शब्दों में, याचिकाकर्ताओं को अंकों के मूल्यांकन के उद्देश्य से योजना या उसमें निर्धारित अनुपात को चुनौती देने का अधिकार नहीं होगा. इसे बरकरार रखा गया है और पिछले आदेशों में इस अदालत की मंजूरी मिल चुकी है.’
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